आदम और इबलिस की बाज़ी

आदम और इबलिस की बाज़ी 

ये एक चांदनी रात की बात है एक 63 साल की उमर का अपराधी कारेगार की काल कोठरी के क़ैद में सो रहा है,
इस अपराधी का नाम इबलिस है जिसपे अपने दोस्त आदम की हत्या के जुर्म में उमर कैद की सजा मिली है,
इबलिस पहले बोधगया का सबसे अमीर इंसान था, इबलिस के पिता आजाद मिया एक जमींदार की इकलौती औलाद था।
  आज़ाद मिया ने बोधगया में लोगों को अपनी आधी ज़मीन दान दे कर लोगों को पनाह दी थी जिस वजह से आज़ाद का और उसके बेटे इबलिस की इज्जत पूरे बोधगया में थी।
 जब इबलिस 48 साल की उमर का होता है तो एक सूर्य ग्रहण के दिन वो अपने कुछ दोस्तो के साथ दीपू की चाय दुकान पे चाय की चुस्की के साथ गप लड़ा रहा होता है।
 इबलिस मिया एक बहुत ज्ञानी व्यक्ति है जिसे उपन्यास पढ़ने का बड़ा शौक है एंटोन चेखोव उसका पसंदीदा लेखक रहता है।
  चाय पीते वक्त काफ़ी जिंदादिली की बातें हो रही है
इबलिस अपना हाथ टेबल पे पटकते हुए अपने दोस्तों से कहता है के मुझे उमर क़ैद की सजा से बेहतर फांसी की सज़ लगती है क्यों के धीरे धीरे तड़प के मरने से बेहतर है एक बार में मर जाना।
 तभी महफिल में बैठे दोस्तों में से एक दोस्त जिसका नाम जिब्राइल है कहता है
न जीने से कई गुना बेहतर है किसी भी हाल में ज़िन्दा रहना
सरकार अगर मुर्दा को ज़िन्दा नहीं कर सकती तो किसी ज़िन्दा को मारना भी अपराध है
तब उनमें से एक दोस्त जिसका नाम हाबिल है वो कहता है,
उमर कैद और फांसी दोनो ही अनैतिक है क्यों के सरकार का काम है गुनाह को खत्म करना गुनहगार को खत्म करना या उसपे जुर्म करना भी तो खुद में एक गुनाह है इस हिसाब से तो सरकार सबसे बड़ी गुनहगार है।
 तभी एक बार फिर से अपने हाथ टेबल पे पटकते हुए इबलिस कहता है के मैं 2 करोड़ की बाज़ी लगाता हूं अगर तुममें से कोई भी उमर कैद क्या अगर 5 साल भी एक बंद कमरे में रह सके तो ये 2 करोड़ रुपैया उसका।

बाज़ी का नियम ये होता है के 5 साल तक एक रूम से कभी बाहर नहीं निकलना और रूम में उसे खाना और संगीत और किताबे जब चाहिए रूम में रखी एक घंटी बजाने पे रूम के बाहर बैठा दरबान जिसका नाम होरस है वो उन चीज़ों का इंतजाम कर देगा
मगर इस रूम से 5 साल पूरे होने के बाद ही निकला जा सकता है अगर बीच में वो बाज़ी को खत्म करना चाहे तो बाज़ी खत्म नहीं हो सकती।

 ये सुन के सब ख़ामोश हो जाते हैं मगर एक 26 साल का लड़का आदम जिसके परिवार को बोधगया में इबलिस के पापा ने बसाया था जो उन सभी में सबसे छोटा होता है और बोधगया में एक साधारण लोकल टूरिस्ट गाईड होता है,
 वो भी वहां चाय पी रहा होता है और जब वोह ये बाते सुनता है तो उत्साह में आ जाता है, आदम अमीर खानदान से नहीं जो बोधगया के बाहर से आएकर बसा है उसे बोधगया के जमीनदार लोग हमेशा नजरंदाज किया करते है और खुद से गया गुजरा समझते है और उनसे इज़्ज़त पाने के चक्कर में आदम बिना कुछ सोचे समझे अपने हाथों को टेबल पे जोर से पटकता है जिस वजह से वहां पे काफी आवाज होती है और पूरा टेबल हिल जाता है तब सभी गुस्से में आदम की तरफ देखने लगते हैं,
  आदम कहता है,
मुझे ये शर्त मंज़ूर है, 5 साल क्या मैं तो 15 साल भी रह लूं।

आदम और इबलिस में शर्त लग जाती है.
शर्त के पहले साल आदम एक गिटार और बांसुरी के साथ कुछ कॉमिक्स पढ़ने को मंगवाता है जिसमे से राज कॉमिक्स, मार्वल और डीसी की कॉमिक्स होती है।

शुरू के कुछ महीने तो ठीक से बीतते है मगर फिर कभी कभी कमरे में से रोने की आवाज आती है 

शर्त की दूसरी साल आदम पढ़ने को कुछ नहीं मंगवाता केवल सोया रहता है या फिर कभी कभी बांसुरी तो कभी कभी गिटार बजाता है तो कभी कभी रूम से चीखने की आवाज तो कभी जोर जोर से रोने की आवाज आती है
क्यों के आदम तन्हा और अकेलेपन की वजह से बहुत घबराया रहता है।

शर्त के तीसरे साल आदम रसियन लिटरेचर की किताबे और उपन्यास और डायरी और पेन मंगवाता है
वो लिटरेचर पढ़ना और लिखना शुरू कर देता है
अब वो हर रोज कुछ लिखता है फिर पसंद न आने पे उसको फाड़ के फेक देता है और कभी कभी कल्पना करके हस्तमैथुन करता है जिससे उसका अकेलापन थोड़ी देर के लिए दूर होता है।

तीसरे साल रोने और चिल्लाने की आवाज कभी ही कभी आती है अब वो फ्रांस काफ्का और नेजचे और डोसोएवस्की के उपन्यासों को काफी आनंद में पढ़ता है।

शर्त के पांचवे साल वो धार्मिक किताबों की मांग करता है।
अब आदम सोता है, जागता है, खाना खाता है फिर पढ़ता है या लिखता है हस्तमैथुन भी अब कभी ही कभी करता है।
कभी कभी आदम इबलीस को पैगाम भी लिखा करता है जिसमे वो कविताएं लिखता है।
एक ख़त में आदम लिखता है,
मेरे प्यारे दोस्त इबलीस 

’रौशनी की तलाश है तो अंधेरे में जाओ,
रौशनी में ही अंधेरा है और अंधेरे में ही रौशनी।

रौशनी बत्ती में नहीं मोम में होती है,
बत्ती तो केवल रौशनी का भाव है।

रौशनी सूर्य में नहीं सूर्य तो रौशनी का एक भाव है,
रौशनी हर वक्त हर जगह है तुम जिसे रौशनी समझते हो वो कुछ पल का झलावा है, 
आंखों से पट्टी हटाओ क्यों के रौशनी तुममें है, रोशनी मुझमें है अंधेरा तो आंखो पे पड़ा है अगर आंखे खुल जाए तो 
अंधेरा है रोशनी
रोशनी है अंधेरा।’

दूसरे खत में आदम लिखता है,

’तुम्हारी आदत जितना 
और 
हारना मेरी मोहब्ब्त

तुम जीत पे जीत पाओ
और 
मैं हार की मोहब्बत में मीट जाऊ

कुछ करते रहना काम तुम्हारा 
और 
कुछ न करना खेल मेरा।’

   इबलिस इन खतों को जब पढ़ता है तो उसे कुछ समझ नहीं आता उसे लगता है आदम पागल हो चूका है।

अगले कुछ सालो तक वो तरह तरह की किताबे मंगवाता है,
कभी फिलॉस्फी तो कभी ज्योमेट्री और अब वो कॉपी में कभी सितारों की तो कभी फरिश्तोतो की तो कभी मछलियों की तो कभी कीड़े मकोड़ों की तो कभी हैवानी की तो कभी देवताओं की दुनियाओं की चित्र बनाता है
आदम अब कल्पना में रहना हकीकत से ज्यादा पसंद करता है।

एक खत में वो इब्लिस से कहता है

’मैं कल्पना हूं, कल्पना में मै हूं, कल्पना मैं हूं,
नहीं हूं मैं, मैं तो कल्पना हूं’



इधर इबलिस ने जुआ और सट्टाबाजी और नशे की लत में सालो साल अपनि काफी संपति और धन गवा बैठा है।

साल पे साल गुजरते जाते हैं
इब्लिस और आदम की बाज़ी चलती रहती है
चौकीदार होरूस अब कोई चीखने चिल्लाने की आवाज नहीं सुनता,
और आदम भी अब अकेलेपन का मित्र बन चुका है उसे अब हस्तमैथुन की भी जरूरत नहीं पड़ती।
अब वो ज्यादा समय कुछ लिखता है नहीं तो कुछ पढ़ता है और सीखता है या फिर कल्पना नहीं तो आंखे बंद कर ध्यान करता है।

अब शर्त का आखरी साल है,
शाम की वक्त ठीक उस शर्त के दिन की तरह सूर्य ग्रहण लगा हुआ है और इबलिस अपने रूम में इधर उधर घूम कर शर्त लगाने वाले उस मनहूस वक्त के बारे में सोच रहा है,
इबलिस सोचता है के एक हफ्ता के बाद वो शर्त पूरी होनेवाली है और शर्त के अनुसार उसे आदम को 2 करोड़ देने पड़ेंगे वो सोचता है अगर मैंने ये पैसे दे दिए तो मैं रोड पे आ जाऊंगा मुझे तो अपना घर भी बेचना पड़ जाएगा, मेरा सबकुछ खतम हो जाएगा।

तभी इब्लिस के मन में ख्याल आता है के क्यों न मैं शर्त पूरी होने से पहले ही आदम को मार दूं और ऐसा साबित कर दूं के किसी बीमारी की वजह से उसकी मौत आई है या फिर चौकीदार होरूस पे मौत का इल्ज़ाम लगा दूं।

शर्त पूरे होने से एक रात पहले इब्लिस आदम को मारने के लिए उसके रूम के पास आता है और देखता है के चौकीदार गेट के बाहर शराब के नशे में धुत हो कर सोया पड़ा है।

मौके का फायदा उठा कर इब्लिस रूम की ओर बढ़ता है,
रूम की एक चाभी इब्लिस के पास भी होती है जैसे ही वो रूम में आता है वो देखता है के आदम ध्यान मुद्रा में बैठा है और रूम में अंधेरा है,
 धीरे धीरे वो आदम के पास आता है और शर्मिंदा महसूस करते हुए अपनी आंखे बंद कर के आदम का गला दबाता है तब उसे महसूस होता है के कोई उसके गले को भी दबा रहा है फिर घबरा के वो आदम का गला छोड़ता है और अपनी आंखे खोलता है तब देखता है के रूम में न ही आदम है न ही कोइ है पूरा रूम तो खाली है तब उसकी नजर आदम के लिखे एक खत पे पड़ती है जिसमे लिखा है :
 
’मेरे प्यारे मित्र इबलिस ये पिछले 15 सालों में मैने कुछ नही सीखा और मुझे अब कुछ की जरुरत नहीं
शर्त के पैसे तुम्हारे हैं तुम ही रखो सब कुछ मैं तो हू ही नही
तुम अपने पैसों में खुश रहो 
ये खत मैं यहां रख के जा रहा हूं
ये रूम जिस दिन खुलेगा उस दिन मैं यहां नहीं रहूंगा
जिस वजह से शर्त के सारे पैसे तुम्हारे ही पास रहेंगे’

ये पढ़ने के बाद इबलिस बहुत शर्मिन्दा महसूस करता है तभी उसकी नजर वहां पे रखे एक आईने पे जाती है जिसमे वो खुद को देखता है तो आदम दिखाई देता है।
तब वो घबरा के आईने पे एक हाथ मारता है जिससे आइना टूट कर कई हिस्सों में बिखर जाता है फिर वो उन बिखरे आईने के टुकड़ों को देखता है,
 जिसमे एक में उसे आदम तो दूसरे में इब्राहिम तीसरे में इब्लिस और बाक़ी टुकड़ों में उसके दोस्त दिखते हैं।
और इब्लिस इन आइना को देखते देखते इनमे खो जाता है और
वही सिलसिला खत्म हो के फिर से शुरू हो जाता है।

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पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया

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