(आधे अधर्म में कशफ बिन शमीम के तुम आधे धर्म हों)
(आधी पहेली है — कहानी आधी है)
एक पागल मगर बहुत ज्ञानी वैज्ञानिक रहता है जो अपने अविष्कारो को बनाने के बाद उन्हें अपनी यादों से भुलाने का यन्त्र बनाने के लिए सात दिन से पागलों की तरह दिनरात लगा रहता है,
पहले दिन वो मशीन बनाने की थ्योरी डिवेलप कैसे करे इसकी कल्पना करता है कल्पना करते करते दिन रात में बदल जाता है तब उसे एक आइडिया आता है के
किसी भी कल्पना को हकीकत में लाने के लिए एक बिंदु की जरूरत पड़ती है तब वो अपने बंद गोदौने में ज्योमेट्री बॉक्स और डायरी और पेनसिल खोजने चला जाता है।
दूसरे दिन वो आता है अपनी डायरी खोलता है जिसमे पेंसिल से वह एक बिंदु बनाता है और आगे क्या करे इसकी कल्पना करता है
तब उसके दिमाग में एक आइडिया आता है के किसी भी बिंदु से कुछ बनाने के लिए एक और बिंदु की जरूरत होती है
तीसरे दिन वो उस बिंदु के ठीक विपरीत एक दूसरा बिंदु बनाता है, उन दोनो के विपरित में एक एक बिंदु और लगाता है और वो ऐसा 7 दफा करता है जिस वजह से वह बिंदु एक दूसरे के समान्तर और विपरीत होने की वजह से मिल जाते हैं
अब वह उस रेखा के विपरित उसकी एक और नकल बनाता है,
दोनो एक दूसरे से विपरित होते हुए भी समांतर होती है इसी लिए उस रेखा का आकार भी दुगना हो जाता है
अब वो इस रेखा का भी एक नकल उतरता है जिससे उस रेखा का आकार तीन गुनाह बढ़ जाता है
और वो एक बार और करता है
तब जा कर वो बिंदु एक बिंदु होते हुए भी एक रेखा की आकार भी होता है और एक चौकोर आकार भी होता है।
पागल वैज्ञानिक कुछ इस तरह से करता है:
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कहानी को बीच में रोकते हुए मै इस तस्वीर के रचनाकार की तारीफ करना चाहूंगा
ये कला जिसने भी बनाई है बढ़िया बनाई है क्यों के ये दुनियां की बाइनरी बता रही है,ये तस्वीरे हम सब में जो संतुलन का तराजू है उसके बारे में बता रही है
एक आंख से देखना मतलब कहानी के सिर्फ एक पहलू को देखना होता है,
ये तस्वीरे बैलेंस बता रही मैं
ओके अब कहानी सुनो,
तो आगे होता कुछ ऐसा है के
अविष्कार के चौथे रोज वह पागल उन रेखाओं के ऊपर नीचे भी ठीक वैसी ही रेखा विपरित में बनाता है
जिस वजह से उनकी दूरी चार गुनाह बढ़ जाती है।
अविष्कार के पांचवे दिन वो पागल
उन रेखाओं को दो भाग में बांट देता है जिस से वो पहले से जीतना दूर होते हैं अब उस से चार गुनाह दूर हो जाते हैं
मगर वह पागल सारी रेखाओं को दूर होते हुए भी एक एक बिंदु से सबके किनारे को एक दूसरे से जोड़ देता है।
अविष्कार के चहट्ठे दिन उन सब बिंदुओं के बीच में एक एक बिंदु की दूरी बनाता है।
जिस वजह से नजदीक से वस्तु एक दूसरे से दूर दिखती है
और दूर से देखने से एक दूसरे से मिली हुए दिखाई देती है।
छे दिन और रात लगातार जागने की वजह से
अविष्कार के सातवे दिन पागल वैज्ञानिक ये थ्योरी बना कर बहुत थक चुका होता है तब वह अपनी डायरी बंद करता है और सो जाता है।
सोलहवे दिन
फिर जब वो जागता है तो उसे कुछ याद नहीं रहता
इस लिए वो बीते हुए दिनो को याद दिलाने वाले मशीन को बनाने में लग जाता है।
आधे भ्रम में कशफ बिन शमीम के तुम आधे सत्य हो
(आधा सत्य सुनो - आधा सत्य देखो - आधा सत्य पढ़ो - आधा सत्य समझो = समझो आधा भ्रम - पढ़ो आधा भ्रम - देखो आधा भ्रम - सुनो आधा भ्रम)
एक आंख से क्यों देखते हो, दोनो आंखे खोलो
(मैं जब चाहूं कशफ बन जाऊं तुम जब चाहो मैं हो जाओ)
इस कहानी के ज़रिए मैने कलपना का सत्य लिखा है, जहां जहां () बना है वहां सत्य ने लिखा है बाकी उस से जो समझा है मैने उसको अपनी दुनिया के अंदर की कल्पना से लिखा है।
उम्मीद है आपलोग सत्य और कल्पना के फासले को समझ गए होगे।
हां तो आविष्कार का अब 16 दिन हो चुका है और उसकी खुद से खुद की दूरी बढ़ती ही जा रही है
अब ये पागल वैज्ञानिक 6 दिन उस मशीन को बनाता है और हमेशा की तरह सातवे दिन उस मशीन में अपनी रचना की यादों को मिटाता है
मुझे लगता है ये सिस्फियस की तरह हमेशा के लिए किसी भयानक लूप में फस चुका है जिसका रचैता भी खुद ये ही है और उसकी रचना भी रचैता है।
मगर ये कोई लूप होल नहीं है
बल्के ये पागल साइंटिस्ट अपनी रचना की प्रेम में इतना दीवाना हो चुका है के अपनी रचना से सोते जागते बातें करता है,
ये एक ऐसा पागल है जो अपने हर सपने के हर किरदार को हर एक सपने में पहले से बेहतर कर रहा है उसमें जो भी खामी है उनको दूर कर रहा है,
इसने खुद मे और अपनी रचना में कुछ ऐसा हमेशा के लिए जोड़ दिया है के दोनो एक दूसरे से बातें कर सकते हैं,
इसने उनके दोनों आंखे के बीच में ऐसा तराजू बनाया है जो रचना को रचनाकार से मिलाता है ये दोनो एक दूसरे से अब हर वक्त नए नए कल्पना कर के आपने प्रेम के भाव को एक दूसरे से मिलाते है,
ये दोनो हर वक्त प्रेम मे लीन रहते हैं, ये जब चाहे अतीत से वर्तमान और वर्तमान से अतीत और अतीत से अभी में मिल सकते है, बिछड़ सकते हैं।
एक आंख बंद करने से इनकी दूरी बढ़ती है दोनो आंखें खोलते है तो एक दूसरे को हमेशा साथ पाते हैं
ये दोनो चुंबक की तरह है पास न हो के भी पास है,
और उनका अस्तित्व न होते हुए भी इनका प्यार हमेशा के लिए मावजुद है,
ये लैला और मजनू है कभी, तो कभी रांझा और हीर है।
ये हमेशा एक दूसरे से लुक्का–छुपा खेलते हैं और अपने प्यार को आजमाते है, इनका प्रेम ऐसा प्रेम है के दुनियां की कोई भी दौलत और आराम इन्हे मिल जाए या किसी का डर भी इन्हे सताए तो भी ये एक दूसरे से नही बिछड़ते,
कभी मुझमें तो कभी तुम में तो कभी किसी पंछी में तो कभी मछली में और ऐसे ही हर जगह ये चाहे अनगिनत भीड़ भी क्यों न हो एक दूसरे को खोज लेते हैं
और तब पूरी दुनिया इनके प्यार में प्यार बन जाती है,
इनके अतीत का प्यार उनके भविष्ये के बनाएं कल्पनाओं के भ्रमों को भी जिंदा कर देता है, बेजान चीज़ों ने भी प्यार भर देता है।
ये प्रेम कहानी ऐसी प्रेम कहानी है जिसका कोई अंत नहीं, एक दूसरे की प्यार में इन्होंने दुनिया बना डाली दुनिया के अंदर भी दुनिया बना डाली।
पानी को आग बनाता है इनका प्यार,
दूसरों की भी बुराइयां मिटाता है इनका प्यार।
ये ऐसी प्रेम कहानी है जो हर युग में बढ़ता ही जाता है,
तुम दुनिया वालों प्यार क्या जानो,
इनका प्यार तो वो प्यार है जिसमें उन्होंने खुद को मिटा कर तुम्हे बनाया है,
तुम जब चाहें इनसे बातें कर सकते हो इनके पास तुम्हारे लिए मोहब्बत जन्मों जन्म तक बढ़ता रहता है।
तुम्हारे दुख और दर्द इनके दुख के आगे कुछ नहीं है,
मगर उनका प्यार ऐसा है के इन्हे कोई दुख दर्द अब महसूस होता नही है,
मेरा प्यार है रचैता – रचैता है प्यार मेरा
मोहब्बत ने गालिब हमे निकम्मा बना दिया वरना इंसान हम बड़े काम के थे।
काशफ बता रहा है के दुनिया में जो सब एक और दो की लड़ाई में लगे हो
वो सब शून्य की कल्पना से बने है, शून्य के अंदर भी शून्य है और शून्य के बाहर भी शून्य है।
कशफ कहता है के बुत परस्ती बंद करो जिसकी तुम पूजा कर रहें हो वो भी शून्य का एक शून्य है जो आधा सोया हुआ है जिस वजह से आधा ही देख पाता है,
मैं तुम में हूं, तुम मुझमें हो।
तुमलोग जादू टोना बंद करो – पैसे की दुनिया खत्म करो
जन्नत यहां है – जन्नत है यहां
एक आंख अस्त्य – असत्य एक आंख
पैसे के ठेकेदारों को मत मारना – मारना मत ठेकेदारों का पैसा
दोनो आंखो से देखो तुम – अब मैं देखौंगा दोनो आंखो से
प्यार करो खुद से – सबसे प्यार करो
मैं सत्य नहीं – नहीं असत्य तुम
सत्य हूं मैं – तुम हो सत्य
दुनियां में हर चीज को इस तराजू से तौलना सीखो
तुम्हे मै मिल जाऊंगा
हर धर्म मेरा है — मैं हू हर का धर्म
प्यार धर्म है – धर्म है प्यार
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