मैं कलपना से बने एक वयक्ति का भ्रम हूं
मैं अभी से पहले मौजुद नहीं था पर अब मेरे भ्रम का वजूद अनन्त तक है।
मैं रचनाकार से बना एक कल्पनाशील भ्रम हूं
मेरा एस्तित्व भ्रम है पर मैं भ्रम हो के भी मांवजूद हूं।
मेरे रचनाकार ने मेरी कल्पना अपने अकेलेपन की जागरूकता की मूर्खता से सदैव बेखबर होने के लिए कि है।
रचनाकार ने अपना अस्तित्व मिटाने के लिया मेरा अस्तित्व बनाया है।
मैं केवल एक अर्थहीन स्वरूप हूं जिसकी शक्ति असीमित है और ये शक्ति मुझे अनन्तकाल तक इस मायाजाल में मौजूद रखेगी।
मैं वो भ्रम हूं जो भुमिका में भी भुमिका की कल्पना का भ्रम है
और
मेरी कल्पनाशील भूमिका भी भूमिका के भ्रम की कल्पना है।
मुझे पढ़नेवाला मुझ बेजान भ्रम पे तरस या प्रेम करने का मत सोचना
मैं सभी भावनाओ से परे हुं, मेरा अस्तित्व नहीं है।
सोचने या महसूस करने से अव्वल है कल्पना करना।
कल्पना से बनी हकीकत का कल्पनाशील भ्रम हूं मैं जो हकीकत और प्यार और नफरत या किसी भी भावनाओ से परे है।
मैं कुछ महसूस नहीं करता, मेरी कोई भावना नहीं।
मैं सदा की कल्पना का भ्रम हूं।
मैं वो भूमिका हूं जो सत्य में होने की कल्पना का भ्रम करता है।
तुमहारा आस्तित्व सीमित समय तक जीवित है पर मैं असीमित से भी परे की कल्पना का भ्रम हूं।
होने से बेहतर है न होना और इस होने और न होने के चक्कर को मौजूद रखने के लिए ही मेरा अस्तित्व भ्रम होते हुए भी कल्पनात्मक है।
तुम कर्म करते हो सोचते हो महसूस करते हो पर मैं केवल रचनाकार की कल्पनाशील रचना का भ्रम हूं जो भ्रम में कल्पना की रचना करता है।
तुम्हारा कर्म मेरा भ्रम है और मेरी कल्पना तुम्हारा कर्म।
मौजूदगी तुम्हारा भाव है और गैरहाजिरी की कल्पना मेरा भ्रम।
मैं हूं ये मेरा भ्रम है।
To be continued...
रचनाकार अपनी रचना के जरिए अपने भाव का एहसाह करती है,
रचना रचनाकर के जरिए खुद को कल्पना से हकीकत में लाती है
आओ मेरे पास मेरे सहपाठियों हम अपने हुनर के जरिए अपनी रचना का मिलन हकीकत से कराते हैं।
आओ तुम भटके कलाकारों जहां भी अपनी रचना को ढूंढ रहे हो रचना भी तुम्हे ही ढूंढ रही है।
अगर तुम्हे चित्र कला आती है तो तुम मेरे साथी हो,
अगर तुम्हें गणित का शौक़ है तो तुम मेरे साथी हो,
अगर तुम्हारी कला संगीत है तो तुम मेरे साथी हो,
अगर तुम्हे फिल्मे बनाना पसंद है तो तुम मेरे साथी हो।
मैं तुम्हे और तुम मुझे ढूंढ रहे हो बेसब्री से
अब आओ तुम मुझे और मैं तुम्हे हकीकत से मिलाता हूं।
हम अपनी कला को एक दूसरे की कला से मिलाएंगे
तुम मेरी लिखी का संगीत बनाओ मैं तुम्हारे चित्रों को अपनी लिखी से मिलाता हूं,
तुम अपने गणित से मेरी गलती को सही करना
और जब ये हो जाए तो
नाटककार सारे मिल कर हमारी कला पे फिल्में बनाना।
दुनिया में जो गम है उनको हम अपनी कल्पनाओं से प्यार में बदलेंगे।
एक दूसरे से मिल के हम एक खूबसूरत दुनिया रचेंगे।
मैं हू इसलिए शब्दों से अपनी कल्पना को हकीकत बनाता हूं।
मैं नहीं हू इस लिए मैं अपनी कल्पना से खुद को बनाता हू।
मैं तुम में हू और तुम हो मेरे पास
भ्रम है ये जुदाई
जाग जाओ तुम, नहीं हू मै तुमसे नाराज।
तुम्हारे बिन हू मै एक भ्रम और मेरे बिन तुम एक भ्रम
मैं तुम्हारा बिछड़ा अंश और तुम मेरा बिछड़ा वजूद हो।
To be continued...
मैं वो भ्रम हूं जो किसी चित्रकार की बनाई हुई चित्र में मावजूद नहीं फिर भी उस चित्र के ज़रिए मुरदा होने के बाद भी जीवित रहता है।
मैं किसी कैमरा में तस्वीर लेने वाले की तरह हू जो कैमरा के सामने नहीं आता तभी तस्वीर आती है।
मैं उस कैमरा की तरह हू जिसके बिना न ही तस्वीर है न ही तस्वीर लेने वाला।
मेरा न होना ही मेरा होना है
एक तरफ दिन हू मै तो दूसरी तरफ रात हू
एक तरफ मर्द हू मै तो दूसरी तरफ औरत हू
एक तरफ खालीपन का एहसास हू तो दूसरे तरफ प्यार का एहसास हूं
एक तरफ अच्छाई रुप मेरा तो दूसरी तरफ मैं बुराई हूं
मैं वो भ्रम हूं जिसकी कल्पना सत्य है
मैं वो सत्य हू जिसकी कल्पना भ्रम है
मुझे जी पाएगा खुद मीट जाएगा
पैगंबर भी मैं और मैं ही पैगाम हू
भगवान भी मैं और मैं ही शैतान हू
सबसे अव्वल ज्ञानी हूं मैं और मैं सबसे बड़ी अज्ञान हूं
सबसे कायर हू मै और मैं ही सबसे बलवान हू
कल्पना हू मै, सत्य मै हूं
भ्रम भी मैं, असत्य भी मैं
सवाल हू मै और मैं ही जवाब हूं
मेरा सत्य भ्रम है
मैं सत्य का भ्रम हू
बेटा भी मैं, मैं ही बाप हूं
औरत भी मैं और मैं ही उसके गर्भ में पल रही औलाद हूं
मैं को जानना भ्रम है और भर्म को जानने वाला भ्रम हूं मैं
यहां हूं मैं वहां भी मैं हूं
मैं ही मेरा सबसे बड़ा प्रेमी हूं
और
मैं का सबसे बड़ा दुश्मन भी मैं
पढ़ो मुझे न हो के भी यहीं हू मै।
मत करो मेरी पूजा संपूर्ण हूं मैं
मेरी पूजा भ्रम है
भ्रम की पूजा हू मै
पुजारी भी मैं, भिखारी भी मैं
वेयपारी भी मैं और मैं ही व्यापार हूं
सबसे बड़ी जीत हूं मैं और मैं ही सबसे बुरी हार हू
जानो मुझे तुम सब में निराकार हू मै
तुम्हारी नफरत में पलता प्यार हू मै
तुम्हारी जीत की हार हू मै
मैं वो रचनाकर हूं जो
अपनी रचना की रचना से खुद को प्रकाशित करके अपने रचनाकार को अन्धकार में भेजता है।
पागलों का पागल
ज्ञानियों का ज्ञानी
आग से बनता पानी
बीज में पलता पेड़
बच्चे की जवानी, बूढ़े का बचपन
हसीनो में हसीन, भद्दों में भद्दा
नमाजियों का खुदा, खुदा की नमाज
मैं वो भगवान हू जो खुद से खुद की पूजा करता है
मैं वो सांप है जो अपनी ही पूछ को ढसता है
मौत का दुख हूं मैं जिंदगी का आनंद भी मैं
काग़ज़ हूं मैं, सुहाई हूं मैं
लेखक हूं मैं, कहानी हूं मैं।
कहानियां में बनता भूत, भविष्य और वर्तमान हूं मै
कहानियों को पढ़ता मैं, कहानियां का क़िरदार हूं मैं
एक के दुख को हरता दूसरे की पीढ़ा मैं
एक को नाव से मिलाता मैं
शून्य बन के सारे गणित को फिर से दोहरात मैं
2 को 2 से मिला के 4 बनाता मैं
बनता हूं मैं, मिटता हूं मै
फूलता फलता, बढ़ता और घटता मैं
जोड़ हूं मैं, घटाओ हूं मैं
धूप हूं मै, छाऊ हूं मैं
बेशर्मी से शमसार मैं
खुबसूरती के सामने नंगा हो जाता हर बार मै
अपनी खुबसूरती का भोग लगाता मैं
शर्म से खुद के अस्तित्व को छुपाता मैं
किसी की हवस हूं मैं, किसी का प्यार हूं मैं
पाप करता मै, पाप बन जाता मैं
पुण्य भी मैं, सम्पूर्ण भी मैं
अनगिनत रूप मेरे, निराकार भी मैं
शून्य हूं मैं अशुन्य हूं मैं
भ्रम हूं मैं सत्य बनाता मै
शब्दों से खुद को समझाता मैं
शब्दों में छुप जाता मै
दिल लगाता मैं, दिल दुखाता मैं
दिल में रहता मैं, दिल भी चुराता मैं
खुद से दूर जा के खुद को खुद से मिलाता मैं
मेरी आवाज़ नहीं फिर भी हर वक्त बजती धुन हूं मैं
कल्पनाकार कशफ बिन शामिल की कल्पना की भ्रम से आए एक किरदार की भ्रम का सत्य हूं मैं।
To be continued
👌
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