जिस तरह जंगली घांस किसी खेत में उग कर फैलती है और धीरे धीरे पौधों की जगह ले लेती है और हमारी फसलों को खराब कर देती है
ठीक इसी तरह हमारे प्यारे शहरों और गांवों में बुराई धीरे धीरे फेल कर हम सब में बुराई भर देती है।
जिस तरह एक किसान अपने खेत की हिफाज़त करता है इसी तरह हर नागरिक को मिल कर अपने गांव और शहर से बुराई को खत्म करना चाहिए।
बुराई किसी धर्म या जात में नहीं बल्के किसी भी इंसान में पनप सकती है,
दूसरे धर्मो से नफरत और लड़ाई करना कोई धर्म नही बल्के अधर्म है
बुराई खत्म करना धर्म है, प्यार और सुकून बढ़ाना धर्म है।
आप किसी भी धर्म से हो अगर आप अपनी खुद की बुराई और दुसरो की बुराई खत्म करने में सहयोग करते हो तो आप सत्य के मार्ग पे हो।
जो किसी पे अपना ज़ोर आजमाता है या अपने फायदे के लिए लोगों से झूठ बोलता है या जो दूसरो को दुखी देख कर खुश होता है वो अधर्मी है।
जिस तरह किसान अपने खेत में कई तरह के पौधे लगाता है और उन्हें बढ़ने के लिए उनमें पानी देता है और खाद देता है और उनके पकने का इंतजार करता है
वैसे ही सत्य हमेशा अलग अलग धर्मों के रूप में हमारे पास आता है और हमें बेहतर इंसान बनाता है।
अपने आस पास की चीजों पे ध्यान देना और वहां की समस्याओं को खत्म करना बिलकुल पौधों में खाद देने जैसा है
हमरी भावनाएं और विचार ही हमारे बीज है और हमें अपने विचारों को पाक/पवित्र रखना ही हमारा कर्म है।
हमारे विचार इस दुनिया को बेहतर या बुरा बनाने की शक्ति रखते हैं
मगर हमारे विचारों पे कुछ जंगली घांसो ने कब्जा जमा लिया है जिस वजह से हम उनके विचारों को खुद में और आस पास बोते रहते हैं।
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TV Shows, Film's, Songs, Ideologies, Books aur News के ज़रिए हम सब में अपने बीज बोवाती है और हमे कटपुतली बना कर अपना काम करवाती है,
हमे खुद के विचारों को शुद्ध कर के उनपे चलना चाहिए न के अपनी इच्छा शक्ति दूसरो के हवाले कर देनी चाहिए और उनकी हर बात बिना सवाल किए स्विकार कर लेनी चाहिए अगर उनकी बातें सत्य दिखाती हैं तो अच्छी बात है मगर अगर वो गुमराह करें तो उन बातों को हमे अस्वीकार करना चाहिए।
हम बच्चे नहीं है जो सही और गलत का फर्क न कर सके
हमे खुद पे काबू पाने की कोशिश करते रहनी चाहिए तभी दुनिया से बुराई मिटेगी
दूसरों के विचारों पे चलना सबसे बड़ी गुलामी है
हमे खुद को आजाद रखना चाहिए और दूसरों की आजादी का भी सम्मान करना चाहिए
अगर कोई अपनी आजादी का दूर उपयोग कर रहा है तो हमे उन्हे सबक सिखाना चाहिए।
खुद की बुराई दूर करना और अपनी इच्छा शक्ति का सही उपयोग करना ही अच्छा कर्म और सबका धर्म है।
कशफ की तरफ से आप सभी को सत्यमेव जयते।
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