आप मुझे नही जानते फिर भी मैं हूं।

आप मुझे नही जानते फिर भी मैं हूं;
और मुझे पुराने और नए और अंग्रेजी और अरेबिक और जर्मनी और हिंदी और ये और वो सभी गाने बहुत पसंद है।
वैसे मेरा जीवन एक बहुत साधरण जीवन है अभी तक मैं अपने बाप के पैसे से अपनी जिंदगी जी रहा हूं।
ऐसा नहीं है के मैं नालायक हूं मगर मेरी समस्या ये है के मुझे अबतक कोई सही काम नही मिला
मैने पहले कुछ समाज सेवक और कुछ नाटक वालों तथा लिखने और वीडियो एडिटिंग का काम किया है मगर हर जगह लोग मुझसे बकवास काम करवाते हैं इसी लिए मैं कोई काम नही करता।
आज का समाज इतना बेखबर है के उन्हें अपनी फैलाई गंदगी दिखती ही नही।
अब लोग गलत को सही और सही को गलत कहते हैं।
मैं जिधर भी अपने कदम बढ़ाता हूं तो मुझे भ्रष्टाचार दिखता है।
आज के बच्चे और युवा ज्ञान के लिए नहीं बल्के केवल पैसे और नाम और शौहरत के लिए पढ़ाई करते हैं।
और तो और youtube और social media पे बकवास देखते और पोस्ट करते हैं। 

आज के शिक्षक भी ठीक से पढ़ाना नही जानते;
आज की पढ़ाई बिलकुल बेतुकी और बोरिंग है।
इसी लिए मैं खुद से जो सही लगता है पढ़ता हूं
और एक साधारण जीवन जीने का प्रयत्न करता हूं।

लोग इतना जल्दी में भाग रहे हैं के उन्होंने अपना सबकुछ पीछे छोड़ दिया है।
न अब किसी का कोई सच्चा दोस्त है न ही किसी परिवार में खुशियाली है।
लोग अपने बोरिंग काम से आते ही अपने परिवार और दोस्तों के साथ एक तनहा भीड़ में अपना समय वयर्थ करते हैं।
टैकनोलजी ने लोगों को मशीन की तरह बना दिया है,
अब लोगों को सोचना नहीं आता वो केवल एक ही चीज सुबह से शाम सोचते रहते हैं।
कुछ शब्दो और ख्यालों में वो इतना खो चुके हैं के अपने ख्यालों से आजाद होना भूल गए हैं और ख्यालों की गुलामी को ये अपना जीवन समझते हैं।

कभी कभी मुझे ख्याल आता है के लोगों को छोड़ कर मैं इनसे कहीं दूर चला जाऊं मगर मैं जिधर जाता हूं मुझे नए चेहरे तो दिखते हैं मगर सबके ख्याल एक जैसे ही होते हैं।

ऐसा मुरदा जीवन जिसमे आपको सोचने की आजादी न हो और न ही दिल में और आस पास खुशी और शान्ति हो बल्के जब आप शान्ति और खुशी और जीवन के मायने की बात करे तो वो आपको पागल समझे और आपकी बातों का मजाक बना के ठहाका लगाए और आपसे कहे के आपकी सोच गलत है सब कुछ अच्छा तो है आपकी सोच गलत है आप ठीक से देखना सीखे।

तो ये सब सुन कर आपको कैसा लगेगा?

मैं रोज ऐसी बातें सुनता हूं और मुर्दों के साथ जीता हूं,
सबका जीवन बिलकुल कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर की तरह बन चुका है जिसमे वो आदेश लेते हैं और कार्य करते हैं।
रोज एक ही जैसा जीवन जीते हैं और फिर अंत में उदासी से मर जाते हैं।
इंसान सॉफ्टवेयर बन के खुद को इंसान समझने की भूल कर रहे हैं।
इनके वजह से जो इंसान ज़िन्दा है वो भी इनके तरह बन जाता है वरना अकेलेपन में जीता है।

लोगों को अपने औलादों को सही शिक्षा और उनका खयाल तक रखना नहीं आता,
आज के मां–बाप ने अपने बच्चों को अधिक लाड प्यार दे कर इतना बिगाड़ दिया है के उन्हें अपने इलावा किसी का सुख और दुख नहीं दिखता और अपनी खुशी के लिए वो बच्चे किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं,
वैसे कुछ मां–बाप अपने बच्चों पे हमेशा जोर जबरदस्ती करते हैं और ये भी बिल्कुल गलत है।
मां–बाप बच्चे के साथ खेलने और उन्हे कहानियां सुनाने के बजाए उन्हें अपना mobile phone दे देते हैं जिस वजह से बच्चा बाहर के खेल कूद से ज्यादा मोबाइल में रहना पसंद करता है और धीरे धीरे अपने मां–बाप से भी बात करना कम कर देता है।
ये चीज़े बच्चों को मानसिक रुप से बीमार कर रही हैं।
आज का इंसान शादी का मूल्य भी ठीक से नही जानता,
किसी को प्यार तक करना नही आता।
पति या पत्नी दोनो के से एक हमेशा दूसरे पे हावी रहता है,
क्या ऐसे जीना आपको सही लगता है?

इंसान कुछ बनने के चक्कर में जो पहले से बेहतर है उन्हे भी खराब किए जा रहे हैं।
स्वाद के लिए अजीब अजीब खाना खा कर नई नई बिमारिया ला रहे हैं, 
पता नही आने वाली पीढ़ी को ये कैसा भविष्य देंगे?

दूसरों के इशारों पे नाचने को ये सफलता कहते हैं और अगर आप इनसे कहो के आप दूसरों के इशारों पे नाच रहे हैं तो ये आपसे कहते हैं के मैं किसी के इशारे पे नही नाचता बल्के दूसरे मेरे इशारे पे नाचते हैं,
इन्हे ये नही समझ आता के किसी के इशारे पे नाचना या किसी को अपने इशारे पे नचाना एक ही चीज है,
नाचनेवाला और नचाने वाला दोनो ही तो एक दूसरे के गुलाम हैं?
मैं रोज इनका नाच देखता हूं और इनकी खामियों पे गौर करता हूं।
मेरा दिमाग अकेलेपन का शिकार न हो जाए इसी लिए मैं खुद को सही रखने के लिए हमेशा जो देखता हूं उसको लिखता हूं।
और कोशिश करता हूं के कुछ तो सही बदलाव लोगों के जीवन में आए जिस वजह से जीवन का पहिया सही दिशा में चले।

मे हू पर मैं आनन्द का अनुभव तब ही करता हूं जब मैं अकेला होता हूं क्यों के तब मेरी सोच पे कोई पहरा नही होता जिस वजह से मैं खुद को उभार पाता हूं।

लोगों के साथ रहने से मैं उनकी ऊर्जा अपनी ओर आकर्षित करता हूं जो मेरी इच्छा शक्ति पे काबू पाना चाहता है इसी लिए लोगों से बात करने के बाद मैं अकेला हो कर उनकी ऊर्जा अपने अंदर से निकालता हूं और अपनी ऊर्जा बढ़ाते रहता हूं।

इस वजह से मेरी ऊर्जा कुछ लोगों तक पहुंचती है जिसमे उन्हे बुरी ऊर्जाओं से आजाद करने की शक्ती होती है।
एक समय आएगा जब मेरी ऊर्जा चारों दिशा में फैलेगी मगर उस समय को आने तक मुझे समय समय पे अपनी ऊर्जा फैलाते रहनी होगी।
दूसरों की ऊर्जा खुद में लेना भी मेरे लिए जरूरी है तभी तो उनकी ऊर्जा शकती साफ होगी और उनमें मेरी ऊर्जा समाएगी।
लोगों की ऊर्जा मुझे तकलीफ तो देती है मगर साथ ही साथ वो मुझे ताकत भी देती है।
मैं हूं और मेरा होना ही काफी है;
आप हो लेकिन आपका होना काफी नहीं क्यों के कुछ न कुछ बनने के चक्कर में आपने अपने आस्तित्व को धीरे धीरे अंदर ही अंदर दबा दिया है।

लेखक : कशफ बिन शमीम 

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