सूरज की गरम सांसों की हवा/ऊर्जा जब बर्फीले चांद को चूमती है तो चांद पिघलना शुरू करता है और उसके आस पास आकाश गंगा कि नदी बहने लगती है फिर जब सूरज चांद से हवा/ऊर्जा वापस लेता है तो चांद का पानी सुख कर जमीन बन जाता है, और जबतक जमीन और पानी में सूरज की ऊर्जा मौजुद होती है जीवन मौजूद होता है।
Comments
Post a Comment