मुसाफिर हूं मैं दुनिया पे
कप्तान हूं मैं कशफ नाम की जहाज़ का
जिसकी मदद से मैं समय के रेत की नदी के बाहर और अन्दर की दुनियाओं का सफर करता हूं।
इस जहाज़ पे किसी भी लुटेरे ने अगर कभी भी दिमागी या शारीरिक या भावनात्मक रूप से हक जमाने की कोशिश की तो उस फर्जी कप्तान को बहुत महंगा पड़ेगी
क्यूं के जैसे ही ये जहाज़ का समय खत्म हो जाएगा मैं उन लुटेरों से हिसाब लूंगा।
तुम अपना धर्म और ज्ञान अपने पास रखो और रही बात मेरी तो मैं खुद मेरा धर्म और ज्ञान हूं।
दुनियां के सफर में जो मुझे जितनी तकलीफ देंगे उन्हे दुगने रूप से लौटाना पड़ेगा
क्यों के किसी को इजाज़त नहीं है किसी पे हक जमाने का।
अब चाहे वो पैसे वाले हो या फिर सरकार हो या फिर कोई धार्मिक गुरु हो या शिक्षा केंद्र या विज्ञान हो
जिसने भी इंसान को अपना गुलाम बनाया वो सब हिसाब देंगे।
खास तौर पे वो जिन्होंने लोगों को विचारों का गुलाम बनाया, उनसे सख्ती से हिसाब होगा।
दुनियां पे सब का हक है पर अंधेरे के पुजारियों ने काली शक्तियों को हमारी दुनिया पे बुलाया है जिन्होंने हम सब के दिल और दिमाग पे कब्जा कर रखा है, हमरी इच्छा शक्ती का फायदा उठाया है।
जो खुद को सबका खुदा समझने की भूल कर बैठे हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।
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