न ही डिब्बे के अंदर और न ही बाहर

तुम्हारी ये बाहर की दुनियां बेतुकी है, जिसमे एक को ज़िन्दा रहने के लिए दूसरे को मरना पड़ता है,
तुम्हारी दुनियां में जीवन तकलीफ़ से आता है और मौत भी तकलीफ़ में होती है और जबतक जीवन रहता है तुमलोग तकलीफ़ देते हो।
तुम बार बार सत्य को अलग अलग धर्मो में बाट कर अलग अलग नाम से खुद की पूजा और तुम्हे पूजने वालों को आपस में लड़वाते हो।


ये दुनियां सबके लिए मुफ़्त में मिली थी मगर तुमने राज करने की लालच में जमीनों का सौदा किया, जीवन का सौदा किया और सबको हर बार की तरह फिर से पैसे का गुलाम बना दिया।

जीवन सांसों से चलता है पर तुम केवल पैसे से चलते हो
इस दुनियां के राजा अगर दिल से अच्छे होते तो आज सबका जीवन खुशियों से भरा होता
जिनका दिल अच्छा होता है उन्हे तो तुम मार देते हो और तो और बड़े पद तुम केवल उन्हें ही देते हो जो मतलबी और झूठे और भ्रस्थाचारी होते हैं।

समाचार और सिनेमा के जरिए तुम बुरा को अच्छा और अच्छा को बुरा दिखाते हो।
तुम जब चाहे, जैसे चाहे लोगों को अपने इशारों पर नचाते हो।

मेरे अंदर की दुनियां खुबसूरत है, इसमें न ही जीवन है और न ही मौत है, न ही तकलीफ है और न ही दिन और रात है।
मेरी दुनियां मेरा हक़ है और तुम्हारी दुनियां ना हक़ है।

तुम्हारी दुनियां वक्त से चलती है और मेरी दुनियां वक्त के बाहर है।

जिस दिन मेरा वक्त आएगा मैं यहां से चला जाऊंगा और कभी यहां वापस नहीं आऊंगा फिर जब मैं पूरी तरह से केवल अपनी दुनियां में रहूंगा इस दुनियां के सभी राजाओं से सबकी गुलामी का हिसाब लूंगा।

लिखने वाला ] कशफ बिन शमीम [ 
न ही डिब्बे के अंदर और न ही बाहर

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