कलम से निकली स्याही on May 04, 2023 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps मैं कलम से निकली वो स्याही हूं जो खुद से खुद को लिखता है,मैं वो स्याही हूं जो इस नापाकी में भी ज़मज़म और गंगा की तरह पाक है।मेरी शुरवात एक बिंदु के आकार में हुई थी जो आज ज़िन्दा क़िताब है।कशफ बिन शमीम Comments
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