मैं एक इंसान के शरीर में लिखा हुआ उपन्यास हूं

मैं एक इंसान के शरीर में लिखा हुआ उपन्यास हूं;
जिसका रचयिता एक नही अनेक हैं।
उन अनेक लेखकों का जन्म मेरे जैसे उपन्यास से हुआ है।
न वो कभी जीवित थे और न आज मैं जिंदा हूं;
वो और मैं और तुम हमसब केवल कल्पना हैं।

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