मेरे सारे रूप झूठे, झूठी है मेरी परछाई

मैं खुद की कैद में हूं पर कभी कभी इस कैद से मैं भाग जाता हूं;
आज़ादी की खुशी में मैं जब भी बाहर आता हु;
एक नए क़ैदख़ाने में खुद को फसा पाता हु;
मैं एक ही समय में कई क़ैदख़ानो में कैद हूं;
जितना भी भागूं, खुद का गुलाम हर बार बन जाता हु।
मेरे सारे रूप झूठे, झूठी है मेरी परछाई
कुछ इस तरह खुद को धोखे में रख कर मैने अपनी जिंदगी बिताई।
कशफ

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