मैं वो हूं जो अस्तित्व में नहीं है, आईने में जो दिखता है वो मैं नहीं हूं, मैं तो टूटा हुआ आईना हूं।
मेरे विचार और भावनाएँ मेरी नहीं हैं,
वे बाहर से मेरे पास आते हैं और मुझे नियंत्रित करते हैं।
उन्होंने मुझ पर कब्ज़ा कर लिया है और मैं कहीं भी मौजूद नहीं हूं, केवल मेरे भीतर जो कुछ भी हो रहा है उसके प्रति सचेत हूं।
Comments
Post a Comment